क्या डर के मारे आप नौकरी तो नहीं कर रहे ! क्या कहते है एक्सपर्ट्स

क्या डर के मारे आप नौकरी तो नहीं कर रहे ! 

कुछ लोग अपनी नौकरियों के लिए घुटने टेक कर भीख मांगते है । मार्केट के उतार चढाव या परिवर्तन पर वे घबरा जाते है ।वे डर के मारे नौकरी करते है ।और डर डर के नौकरी करते हैं ।अगर आपके मन में पैसे की कमी का डर जाग जाये तो तत्काल नौकरी ढूंढने के लिए दौड़ मत लगाइये ताकि कुछ रुपयों के सहारे उस डर को मार दिया जाएं ।अपनी जिंदगी को चलाने के लिए लोगो को पैसे की जरूरत तो पड़ती ही है । और उनके डर के कारण उनको नौकरी का विचार आता है।

वे इस तरह बोलते है : 

मैं दूसरी नौकरी ढूंढ लूंगा ।

मेरी तनख्वाह बढ़नी चाहिए !

अमीर लोग शोषक होते है ।

अमीर बननके लिए यह पुस्तक पढ़े : 

मेरा सेठ तो बड़ा जालिम है । थोड़े भी पैसे ऊपर नहीं देता !

मुझे नौकरी खोजने की जरूरत है । यह उसकी भावनाएं फैसला ले रही हैं 

अपनी भावनाओं पर प्रतिक्रिया करने के बजाय उनका विश्लेषण करने की कोशिश करो।ज्यादातर लोग यह नहीं जानते की से अपनी दिमाग के बजाय अपने दिल की भावनाओं से सोचते है ।आपकी भावनाएं तो रहेंगी ही, परंतु आपको अपने दिल से सोचना भी आना चाहिए ।डर और इच्छा की भावनाओं के कारण ही ज्यादातर लोग तनख्वाह के चेक , सैलरी में बढ़ोत्तरी और नौकरी की सुरक्षा के पीछे भागते भागते अपनी पूरी जिंदगी निकाल देते है ।

नौकरी दीर्घकालीन समस्या का अल्पकालीन समाधान है 

हमारे मां बाप यही कहते है , “स्कूल में पढ़ो , अच्छे नंबर लाओ , ताकि तुम्हे एक सुरक्षित और अच्छी नौकरी मिल सके  ” और अधिकांश लोग यही कर रहे है।मां बाप घबराए हुए हैं कि शायद तुम पैसा नहीं कमा पाओगे और समाज मे फिट नहीं हो पाओगे।मैं सोचता हूं उनका डर सही भी है । शिक्षा और नौकरी महत्वपूर्ण है । परंतु इससे डर का इलाज नहीं होगा ।

वही डर जो उन्हें सुबह उठकर कुछ रुपए कमाने के लिए प्रेरित करता हैं , उसी डर के कारण वह तुम्हारे स्कूल जाने पर इतना जोर देते हैं ।आज बहुत से लोगों के पास अच्छे नंबर हैं , परंतु सुरक्षित और ऊंची तनख्वाह वाली नौकरियां बहुत कम बची है , खास तौर पर जिनमे रिटायरमेंट योजनाओं जैसे अतिरिक्त लाभ हो ।

इसका इलाज है तुम पैसे की ताकत पर काबू पाना सीखो । पैसे का डर तुम्हारे दिमाग से निकल जाना चाहिए ।

और वह स्कूल मे नहीं सिखाया जाता ।डर और लालच । तुम लोग इस  जाल से बचे रहो।बहुत से लोग कहते हैं :”अरे, मुझे पैसों में कोई रुचि नहीं है ।” फिर भी वे हर रोज आठ घंटे की नौकरी पर जाते है ।

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बिना मन के , बेवजह नौकरी में  फंसे रहने से अच्छा है अपने दिमाग से पूछे कि  “क्या यहां ऐसा कुछ है जो मुझे नहीं मिल रहा है ? ”

भावना पर कंट्रोल कर , अपने दिमाग का उपयोग करें ।

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