पहला सुख निरोगी काया, दूसरा पास में माया

पहला सुख निरोगी काया , दूसरा पास में माया 

कहा जाता है कि पहला सुख निरोगी काया दूसरा पास में माया ।

धन को वो ही भोग सकता हैं जो निरोगी हो । इसलिए पहले स्वस्थ हो जाएं। जिससे हम धन का सदुपयोग कर सकें।

आप पुर्ण रूप से अपने जीवन को उमंग और  उत्साह से जी सकते है यदि आप शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ हो

नए विचारों का स्वागत कीजिए

आज का युग सबसे ज्यादा रोमांचकारी है । मैं चाहता हूं कि परिवर्तन से डरने के बजाय उसका स्वागत करें ।

पास में माया हो , इसके लिए नए नए विचारों का स्वागत कीजिए । कैसा भी परिवर्तन आए ,अपने अपने आप को उसमें ढाल लीजिए ।

 

 

 

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