दुनिया परमाणु बमों के ढेर पर बैठी है

दुनिया परमाणु बमों के ढेर पर बैठी है।

संसार नरक की ओर जा रहा है ।

हम अगली महामंदी के निकट है । जोखिम आने वाला है ।

कयामत से भरा पड़ा है माहौल।

निवेशक आर्थिक विकास को लेकर परेशान है या फिर खुश?

घर के पोस्ट और गलियों के नुक्कड़ पर डॉक्टरों के पर्चे चिपके है , नीम हकीम इलाज के लिए न्यौता दे रहे है ।

लोग टीवी कमेंट्री सुन रहे है ।एक एक्सीडेंट की न्यूज को हजारों बार अलग अलग एंगल से परोसा जाता हैं।

हर क्लिप , हर किस्सा कयामत के आ जाने जे संकेत जैसा दिखेगा, इसलिए नही कि कयामत आ चुकी है , बल्कि इसलिए की आप चाहते है की ऐसा हो ।

दुनिया अंधेरे में गति कर रही हैं ।

टाइटैनिक क्यों डूबा ?

को इतिहास में पहले नहीं हुआ ,वो अब कैसे हो गया?

तर्कशील और यथोचित में अंतर है।

संसार के बारे में अनुमान लगाना कठिन है । संसार अप्रत्याशित है । शेयर बाजार की तरह हमे बिल्कुल अंदाजा नहीं है की आगे क्या होगा ?

अप्रत्याशित घटनाएं दुनिया के कांटे को सबसे अधिक घुमाती हैं।

बदलाव स्पष्ट रूप से आया है 

आजादी से लेकर अब तक परिस्थितियां बहुत बदल चुकी है।

त्रुटि के लिए जगह

किसी भी योजना का  सबसे बड़ा भाग तब के लिए योजना बनाना है जब आपकी योजना काम न करे ।

यानी यदि पूरा शहर पानी मे डब रहा हो यानी अभी की  योजना फेल हो गई है तो नेक्स्ट योजना बनाना की अब क्या किया जा सकता हैं ?

चारो ओर अराजकता का माहौल है।ऐसा लग रहा है किसी के पास कोई कंट्रोल हो नही है ।दुनिया अपने मन मुताबिक आचरण कर रही है ।

लेकिन हमे संभावनाओं के बारे में सोचना होगा ।

जैसी मैने उम्मीद की थी , मैं वैसी दुनिया मे नहीं रहता।

कही किसी का नियंत्रण नही है । रूस  यूक्रेन युद्ध जो चाहे चीन का फैलाया कोरॉना ! बड़े संघटन भी बेहद मालूम पड़ रहे है । चाहे who हो या uno।

ऐसा होने लगा है  

अब बेरोजगारी डर पिछले कई दशकों की तुलना में सबसे कम है ।अब कम आमदनी वाले लोगो की आय में अधिक बढ़ोत्तरी हो रही है । मजदूरी दर बढ़ी है।

 

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