गीता श्रीमद्गवद्गीता

       श्रीमद्भगवद्गीता  

अपनी  जॉब से बचत करना सीखो ।

यदि नही बचा पाए तो खर्च हुआ पैसा आपका नही है ।वो आपकी जेब से निकल कर किसी और की जेब में चला गया है।

श्रेयान् स्वधर्मः विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।

स्वधर्मे निधनं श्रेयः पर्धर्मो भयावहः।।

खुद के बिजनेस मे इंटरेस्ट रखो , दूसरे मे रुचि रखेंगे तो इस लोक से भी जायेंगे और परलोक से भी

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।

धर्मसंस्सथर्थाय सम्भवामि युगे युगे।।

चतुरुवङम् मया सुर्षत्म् गुणकर्मविभागशः।

तस्य कतर्मपि मां विध्यकर्तारमव्यम्।।

श्रीमद्भ भगवदगीता जीवन में प्रेम और साहस को लाती है
श्रीमद् भागवत गीता बताती हैं कि धन संपति आपका कर्म और विश्वास से हासिल कर सकते है

काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः।

महाशनो महापाप्मा विध्येन्महि वैरण्डम्।।

नैनम् छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।

नचैन् कलन्द्यन्ते न शोषाहतः मरुतः।। 

आपके पास जो ज्ञान है , उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता । इसे मैनिपुलेट किया जा सकता है । इसलिए  टीवी ,अखबार की न्यूज ना देखते हुए , उपयोगी और अच्छी किताबो को रैफर करो ।

असंशयम महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्।

अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।।

न हि ज्ञानेन सदृशम् पवित्रमिह विद्यते।
तत्स्वयं योगसंसिद्ध कलेनात्मनि विन्दति।।

ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है । ज्ञान से ही सब चीजे मिलती हैं ।यदि आपको अपने काम या बिजनेस के  सभी एस्पेक्ट्स की जानकारी नहीं होगी तो आप असफल हो जायेंगे ।

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युःध्रुवम् जन्म मृतस्य च ।

तस्माद् परिहर्येथे न त्वं शोचितुमर्हसि।।

श्रीमद्भागवत गीता में वक्त का सही इस्तेमाल करना सिखाया गया
श्रीमद्भागवत गीता जीवन जीने के लिए वक्त की बखूबी इस्तेमाल का बताती हैं

अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम् ।

विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते ।।

 

कृशिगौरक्ष्य वाणिज्यं वैश्यकर्म स्ववभवजम्।

परिचर्य आत्मकम् कर्म धुद्रस्यपि स्वभावजम्।।

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि।। 

सुख दुख को समान समझकर लाभ हानि से बिना घबराए अपना कर्म करते चले ।

इस्तरः से किया युद्ध से आप पाप के दोषी नहीं बनेंगे।

 

 

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