कारोबार आर्थिक मंदी और घाटे से चरमराया

कारोबार आर्थिक मंदी और घाटे से चरमराया 

उद्योग , व्यापार में सूनापन पैदा कर दिया है । दिवाली या त्योहार सीजन में भी सड़को पर भीड़ भाड़ है लेकिन दुकानों पर ग्राहकी नहीं है ।

जीएसटी से खजाना भरा जा रहा है ।

सरकार नए नए कर लाए जा रही हैं ।

आयकर दाताओं जा खून पसीना बहाकर कमाए धन को खुलकर लुटाया जा रहा है ।

दलहन तिलहन एमएसपी पर खरीदना और लगे हाथ बेचने की प्रथा शुरू कर दी ।

टैक्स थोप कर वसूलने का धंधा बना लिया है ।

आत्मनिर्भर का ढोल आए दिन बजाया जाता हैं किंतु आत्मनिर्भरता आने की बजाय दलहन तिलहन का उत्पादन घटता जा रहा है । विदेशों से महंगे आयत पर पूरी तरह से निर्भर हो गए हैं । यह तारिक देश को शिखर के बजाय धरातल पर के जायेगा ।

महंगाई की मार चारों तरफ

ग्रामीण महंगाई से ज्यादा त्रस्त । गरीबी बढ़ते जा रही हैं । गरीब और अमीर की खाई बढ़ती जा रही हैं ।

वर्षा के कारण फसल बर्बाद । बाढ़ से तबाही , व्यापार व्यवसाय को करोड़ों का घाटा । पैसे के बारे में अमीर लोग क्या जानते हैं जो स्कूल कॉलेज में नहीं सिखाया जाता है और जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लोग नहीं सीखते है खेरची व्यापारी हो या मॉल वाली कंपनियां उन्ही वस्तुओं को बेचना पसंद करती है जिनपर एमआरपी अधिक मात्रा में प्रिंट होती हैं । इससे उच्च वर्ग सर्वाधिक धोका खा रहा है ।

यदि एमआरपी में सुधार कर दिया जाए तो महंगाई अपने आप कम हो जाएगी । किंतु सरकार नहीं चाहती हैं चाहे जो गिड़गिड़ाता रहे, उसे कोई फर्क नही पड़ता है।

 

मॉल को पूरे देश को लूटने के लिए छोड़ दिया है ।

कारोबार आर्थिक मंदी और घाटे से चरमराया
कारोबार आर्थिक मंदी और घाटे से चरमराया

कारोबार मे घाटा होने से व्यापारी बैंक लिमिट बढ़ा लेता है । इस तरह उसका कर्जा बढ़ता जाता हैं ।

पुराने तरीके से चलने से और पैसे की समझ ना होने से बैंक की ईएमआई डिफॉल्ट होने लगती हैं ।

मध्यमवर्गीय लोगों के पास इतने संसाधन नहीं होते ।वे चुपचाप बैठे रहते हैं और सरकार की सुईयों को अपनी बांह पर लगने देते है । और ब्लड डोनेशन की इजाजत दे देते है ।

आज मैं ज्यादा टैक्स चुकाने वाले या कम छूट वाले लोगों की संख्या से लगातार स्तब्ध होता हूं और वे ऐसा सिर्फ इसलिए करते है क्योंकि वे सरकार से डरते हैं ।

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बहुत से बिजनेस बंद हो गए हैं और इसके लिए सरकार दोषी है ।

फसल काटने को हजारों मजदूर मिल जाते थे ।अधिक मजदूरी देने के बावजूद काम ही नहीं करना चाहते मजदूर ।

 

घाटे और कर्ज से उबरने के उपाय 

पैसे की समझ बढ़ाए ।

बैंक से उतना ही कर्जा ले जितने की जरूरत है ।

बिजनेस में नए तौर तरीकों को अपनाए

आर्थिक मंदी , घाटे और कर्ज से उबरने के लिए इस खेल को चतुराई से खेलना होगा और ऐसा कॉर्पोरेशन के माध्यम से किया जा सकता हैं ,को अमीरों का सबसे बड़ा रहस्य है ।

 

 

 

 

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